• himanshu240sachin 34w

    हे ख़ाबों की दुनिया में खोए हुए आशिक।
    लौट आ जिंदगी तुझे दोनो बाहें खोलकर पुकार रही है।
    खुद को न लूटने दे,इस मतलबी बाज़ार में
    अभी वक्त है,तू खुद को पहचान ले।
    नही तो मौत भी नसीब नही होगी,इस बात को तो जान ले।
    कौन सा ऐसा दर्द है,जिसका वजूद तू मिटा नही पा रहा।
    क्यों बेवजह ही,अपने आप को उस झुंड में तू मिल रहा।
    क्यों उस दरिया में तू रह-रह कर गोते खा रहा।
    खुद को वक़्त दे,और पहचान अपने आप को।
    आँखें बंद कर,और निकाल फेंक अपने उस दिल के मेहमान को।
    तेरे जैसे बहुत आए और आगे भी आएँगे।
    अगर तू यही रहा,तू वे पीछे मुड़कर मुस्कुराएंगे।
    और हँस कर तुझे अपने साथ ले जाएंगे।
    फिर तुझे अपना -अपना किसका रो-रो कर सुनाएंगे।