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    फुल

    शौक़ तो हमें भी था मोहब्बत का,
    पर दुनिया का दस्तूर कुछ और था ।
    फुल तो हमारी निगाहों में वह बसा,
    जो किसी और के बगीचे में खिला था ।।
    ©philosopher_at