• dk_write 25w

    Kash hum mile hi na hote

    आज हमारे रिश्ते को 8 महीने हो गए है, और इस दरमिया हम पहली दफा मिलने जा रहे थे,ऐसा ना था की हम अलग-अलग शहरों में रहते थे,
    हालात ही कुछ यू थे,कि हम एक शहर में इतने करीब होकर भी बाहोत दूर थे।वो बन्द पिजड़े में कैद पंछी सी थी,तो आज मै उस पिंजड़े में
    उससे मिलने जा रहा था ,हमारी एक mutual frnd थी ,उसका भाई बन कर मै जा रहा था।मै खुद को बार-बार आयनें में देख मुस्कुरा रहा था,मै बाहोत ही खुश था ,आखिर मुद्दतो (muddto)बाद उसका दीदार करने का मौका जो मिल रहा था।मै तयार हुआ और थोड़ा सा ही perfume लगाया,उसे perfume की ज्यादा खुसबू पसंद ना थी।

    उसका तोहफा लिया जो महीनों से संभाल रखा था ,गाड़ी लिया हमारी frnd को लेकर उसके घर जा पहुंचा,वो अपने घर के बाहर खड़े , हमारा इंतजार ही कर रही थी।एक-दूसरे को देख हमने मुस्कुराया ।उसने अपनी frnd का हाथ पकड़ घर के अंदर ले गई और मुझे भी बुलाया । हम तकरीबन उसके घर 1:30 घंटे बैठने के बाद, उसका तोहफा देकर अपने-अपने घर आ गए।
    अपने घर पहोच मुझे लग रहा था आज हमे नहीं मिलना चाहिए था,जब हम उसके घर पहुंचे ,तो वो एक जगह टिक ही नहीं रही थी ,बच्चो की तरह खुशी से इधर-उधर भाग रही थी।भाभी देखो मेरी frnd मिलने आई है,उसने अपनी भाभी को आवाज़ दी। उस 1:30 घंटे उसकी भाभी टस से मस ना हुई ,वहीं हमारे साथ बैठी रही।
    मै उसका हाथ थाम ,चूमना चाहता था ,उसे गले लगाना चाहता था, इन सब की दूर ,मै उसे जी भर के देख भी ना पाया,बस एक अजनबी मेहमान की तरह इक नज़र देख,सर झुकाए बैठा रह गया ।
    उस पल मानो जेसे मुझे बेड़ियों में जकड़ दिया गया हो और मेरी आंखो में पट्टी बांध दी गई हो।जिस चीज को पाने के लिए दिन-रात तड़पते हो, उसे पाने के लिए खुदा से मिन्नते करते हो,वो तुम्हारे सामने
    है,इस बात का एहसास तो हो, पर तुम्हारी आंखें फोड़ दी गई हो , तुम्हारे हाथ पैर काट दिए गए हो,ना तो तुम देख सकते हो और ना ही छू सकते हो,मै बाहोत ही लाचार मेहसूस कर रहा था।
    इस मुलाकात ने तुमसे मिलने की तड़प की आग में घी डालने का काम किया था, मैं अशांत सा हो गया था,मेरे अंदर इक आग सी लग गई थी,
    ऐसी मुलाकात से अच्छा हम उस दिन मिले ही ना होते,काश हम उस दिन मिले ही ना होते।


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