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    पराये — from the originals of "Sameer Khan".

    Dedicated to all the great people whom I had the pleasure of interacting in this year 2017.

    @hindikavyasangam @writersnetwork @readwriteunite @aman7khan @asma7khan @jayshri

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    पराये

    हाय क्या है ये मंज़र ज़िंदगी के
    मुझे ये अब भी सपने से लगते हैं।
    कुछ अपने थे जो पराये हो गए
    कुछ पराये हैं जो अब अपने से लगते हैं।।

    समीर खान © _monkfromearth_