• kshatrani_kalam 22w

    मंज़िल से मेरा फ़ासला कम होता देख,
    इस खोकली भीड़ ने फिर मुझे गिराया हैं।
    मैं भी ढीठ,उठ कर मैंने फिर कदम बढ़ाया है,
    आखिर तक़दीर बदलने को अपनी
    कभी न रुकना,
    मैंने यही तो ठानl हैं।
    ©kshatrani