• sumitsharma8080 14w

    हसरतें

    हसरतों की ख़ुशफ़हमियाँ तो बहुत हैं,
    जिस्म से रूह तक परछाइयाँ तो बहुत हैं,
    ‘तू ख़फ़ा ख़फ़ा सा इस ज़िंदगी से
    धुआँ धुआँ मेरा भी लफ़्ज़ है’
    करले क़ुबूल मेरी रजा तेरे पलकों में उतरने की,
    चादर की सिलवटों से लिपटी हुई जिस्म तक सिमटने की,
    बहता हुआ जो ये दर्द का नशा है,
    दर्द हूँ मैं तू भी वहाँ है