• disha_choudhary 14w

    चल पड़ी हूं।

    पलकों पर अपने सपने सजाए, एक ऐसे शहर कि तलाश में चल पड़ी हूं,
    जहां सब मुझे मेरी खूबियों से जाने।
    सारी मुश्किलों का अकेले सामना करने चल पढ़ी हूं,
    ताकि सब मेरे वजूद को माने।
    मोह, मया और दर्र का बस्ता अपने कंधो पर लिए निकल पड़ी हूं,
    घबरा तो रही हूं , पर अपने आर्मनो को पूरा करने मैं चल पड़ी हूं।