• dragonfly99 16w

    सोचना

    सोचते रहना ही जीवन है। या जीवन ही सोचना है हम जीवित है यह कैसे तय होगा। क्या जीवित रहते सोचना रोका जा सकता है क्या सोचना और जीवन एक दूसरे के पूरक है। क्या हम इसका उत्तर बिना सोचे प्राप्त कर सकते है। क्या हम बिना सोचे एक दिन भी रह सकते है। नींद में भी हमारा सोचना जारी रहता है। क्या सिर्फ मृत्यु हमारे सोचने को रोक सकती है या वो भी इसमें असमर्थ है। कौन जानता है।
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