• kishore_nagpal 14w

    कर्म की थप्पड़ इतनी भारी और भयंकर होती है कि - हमारा संचित पुण्य कब जीरो बेलेन्स हो जाए पता भी नहीं चलता है । पुण्य खत्म होने बाद समर्थ सम्राट को भी भीख मांगनी पड़ती है । इसलिए जब तक पंचेन्द्रिय सही सलामत है.....! स्वास्थ्य अच्छा है,... ! बुढ़ापा दस्तक न दे..... उससे पहले सत्कर्म करके पुण्योपार्जन कर लीजिए ।
    जीवन का कटू सत्य है...... "कर्म" एक ऐसा रेस्टॉरेंट है जहाँ ऑर्डर देने की जरुरत नहीं है, हमें वही मिलता है जो हमने पकाया है......!!
    ©kishore_nagpal