• angelthakur 16w

    यहाँ बिन मांगे कुछ नही मिलता
    अपनों का प्यार नही मिलता
    ग़ैरों से सबक नही मिलता
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    कब तक अपनी क़िस्मत पर
    रोते रहोगे
    ग़रीबी का दर्द पीते रहोगे
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    ख़ुदा की ये मंशा
    कभी नही थी
    कि वो ये भेदभाव करें
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    इंसां में इंसानियत बनाकर
    उसने तो ये सोचा होगा
    ये तो एक परिवार है
    आज तू उसके साथ है
    कल वो तेरे साथ होगा
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    अपने दर्द को यूंही
    दफ़नाया ना करो
    अपनी ग़मो की आवाज़
    को गुंजाया तो करो
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    लोगों को भी तो पता चला
    ये महफ़िल उनकी खूद की नही है
    खुदा की हर उस चीज़ पर
    बराबर की साझेदारी है
    अब अपने लिए हिस्सेदारी की बारी है।
    ©angelthakur

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    हमें यूंही कोसा ना करो
    हमें जिंदगी तुम्हारी तरह खैरात
    में नही मिली।
    ©angelthakur