• chahton_ka_prinda_sanjay 6w

    #क्या हम फिर से मिल सकते है

    वो तुमसे मिल जाना याद बहुत आता है
    तुम्हारी यादो के किस्से दिल में रहते है
    हर पल वो चाहत का सामने रहता है
    जिसमे तुम हो और तुम्हारी बाते है

    तुमसे बात तो नहीं मेरी कभी हो पाई
    तन्हाई में हर दफा तुम्हारी याद आयी
    जिंदगी जब जब रंग बदलती रही यहाँ
    रंगत मेरी तुम्हे ही देखने के बाद आयी

    मदहोशी सी मुझमे कहीं रह जाती है
    जो वास्तव में नहीं ख्वाब कह जाती है
    कितने ही अरमान ऐ दिल अधूरे रहते है
    मेरी अधूरगी सबकुछ ये सह जाती है

    जिंदगी के राह ऐ इश्क़ से रोज जाता हूँ
    अपनी ही जिंदगी को यूं जीता जाता हूँ
    कोई अफसाना तुम बिन मुनासिब नहीं
    इसलिए महफिले यूं ही छोड़ आता हूँ

    ये जिक्र तुम्हारा मेरी जिंदगी भर का है
    तुमपर ही यकी मेरा ये दिल करता है
    नहीं कोई बंदिश ऐ जिंदगी अंजाम करे
    आपकी ही चाहत सबकुछ नाकाम करे

    है तमाम मेरी ख्वाहिशे तुम संग सनम
    इस बेताबी का आलम कुछ कहता है
    इन्तजार तुम्हारा हर राह पर करते है
    क्या कभी हम फिर से मिल सकते है

    © चाहतो का परिंदा----संजय