• sunilgupta 5w

    हास्य व्यंग्य

    आयोजन लोकवाणी
    तिथि 16/4/18
    वार सोमवार
    विधा व्यंग्य

    छत्तीसगढ़ी में मेरा पहला प्रयास।

    व्यंग्य

    नवा नवा सिपाही। ड्यूटी में लाठी ल घुमावत बीड़ा पान मुँह में पगुरात जात रहीस। अचक्का एगो टरक के पाछु मा रुक गिस। घुमावत लाठी घुमाना भुला गिस। एक बेर फिर दु बेर फिर तीन बेर टरक के पाछु लिखल ल पढिस। चेहरा लाल हो गिस। गुस्सा में थर थर काँपे लगिस।

    दउड़ के डाइबर करा हबर गे।कालर ले पकड़ीस । खींच के उतारिस। कहिस -" उतर साले!!
    तोर टरक के पाछु मा का लिखाए हस?"

    बेचारा डाईबर, थरथर काँपे लागिस। हाथ जोड़के रिरिया के कहे लागिस-" का होगे साहेब?
    का होगे ?
    सिपाही ओखर कालर ला धर के टरक के पाछु खींच के ले आनिस ।अउ टरक के पाछु मा लिखल रहे ओला देख के कहे लागिस-" एला पढ़ साले ।का लिखाए हे?"
    डाईबर के कालर ला धरल देखके आसपास के जम्मों जन इकट्ठा होगिन।
    " का होगे? ,का होगे? "खुसुर-पुसुर होय लागिस ।
    डाइबर पढीस।
    सिपाही कहिस -"फेर पढ़।"
    डाइबर फेर पढीस।
    एक झापड़ डायरेट्ट ओखर गाल में जमा दिहिस सिपाही ।-"जोर जोर से पढ़ साले । तोर अतेक हिम्मत ! गाड़ी के पाछु मा खुल्लम-खुल्ला लिखाए के चलबे -।".......जगह मिलने पर पास दिया जाएगा".......गुंडा कर बाप तिहीं हस साले ? "
    साहेब !साहेब! एकर मतबल साइड दिया जाएगा होथे साहेब........... ड्राइवर हाथ जोड़ के गिड़गिड़ाये लगिस।
    " मोला बोया समझथस का बे ? मै तोला गँवार दिखथों का..........पास दिया जाएगा मतलब हथौड़ी .....कुटासी से ....मुड़ ल मार के फोड़ दिया जाएगा होथे........।मैं हूं जानथों.....।"

    सिपाही के बात ल सुनके सब्बो जन एक दूसर के मुंह ल ताके लागिन।

    #सुनील_गुप्ता #सीतापुर
    सरगुजाछत्तीसगढ

    ©sunilgupta