• singh_harshwardhan 23w

    भाग-3 (c)

    माउंट आबू शहर में घुसते ही टोल नाका आया, शायद बाहर से आए घूमने वाले यात्रियों से निगम द्वारा कर वसूली की जाती थी। और क्यों न हो, राजस्थान का एक मात्र हिल स्टेशन था माउंट आबू। पापा ने खिड़की खोलके अपना परिचय दिया और वो सज्जन आदमी जो रसीद कॉपी लेके आया था वो छोटा सा मुँह लिए वापस चलते बना।
    शहर के अंदर घुसते ही यूँ लगा मानो, किसी अलौकिक शक्ति ने पहाड़ों के झुंड को तोड़ कर बीच में एक खाली जगह बना दी और वहां आबू बस गया। चारों तरफ ऊंचे पहाड़ों से घिरा ये शहर शायद मेरे ही आने की बाट देख रहा था।
    तड़के सवेरे का वक़्त था और सड़कें खाली थी। स्कूल जाने के लिए बच्चे अलग अलग जगहों पे खड़े दिख रहे थे। मैं मन ही मन अपने आप को अलग अलग यूनिफार्म पहने देख रहा था। हाँ ये वाली अच्छी है, इस वाले कि शर्ट का रंग बेकार है, उसकी फलाना किसीकी ढिकाना। मन अंदर ही अंदर उछाले मार रहा था, नयापन किसे पसंद नही होता और यहाँ तो सब कुछ नया था, नया स्कूल बैग, नई किताबें, नया स्कूल और नए दोस्त।