• krishn_ratii 6w

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    लोगों ने संजय को बिना बात जाने पीटना, गाली देना शुरू किया, लड़की की इज्जत पर हाथ डालता है तुझे तो पुलिस के हवाले करेंगे। अब संजय सकपका गया उसने तो ऐसा कुछ किया ही नहीं था, जैसा लोग समझ रहे थे। उसने तो नीतू में अपनी बहन देखकर उसकी सहायता की थी। लोग उसे अपनी बात कहने का मौका ही नहीं दे रहे थे, वो घबराया सा अपना फोन टटोलने लगा, पर लोगों ने उसे इतना मारा था कि
    उसके शरीर में कई जगह गहरे घाव हो गऐ थे,वो ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था, उसका शरीर दर्द से अधमरा सा हो गया था, आखिर में पीड़ा से करहाकर संजय बेहोश होकर गिर गया।

    जब थोड़ी देर के बाद उसे होश आया तो उसने खुद को जेल में बंद पाया। संजय को होश में आया देख इंस्पेक्टर उसके पास आया और गालियाँ देते कहने लगा- ज्यादा हवस बढ़ गई है तेरी खुले आम लड़की की इज्जत पर हाथ डालता है।
    संजय अपनी बात कहना चाहता था, पर उसकी सुनने वाला कौन था वहाँ??
    इधर पुलिस को उस लड़की का बयान चाहिए था ताकि संजय पर केस दर्ज हो पाऐ। पर वो लड़की(नीतू) तो संजय को पिटता देख, और बिना सच जाने - *(इसे छोडियेगा मत, खूब मारिऐगा ताकि फिर किसी के साथ ऐसा ना करें) * आक्रोश और गुस्से में ये शब्द कहकर, पिछले स्टेशन पर ही ट्रेन से उतर गई थी।
    नीतू के ना मिलने के कारण पुलिस ने (फिर ऐसा कभी मत करना,वरना सालों जेल में सड़ना पड़ेगा) यह कहकर संजय को छोड़ दिया।
    संजय जेल से तो रिहा हो गया पर आत्मघाती आत्मग्लानि की जेल ने उसे कैद कर लिया। रात हो चुकी थी, स्टेशन पर चलते - चलते उसके दिमाग में, लोगों की दी गालियाँ, उस लड़की नीतू के कहे शब्द और पुलिस की दी हुई नसीहत गूंजने लगी, और साथ ही दृश्य बनकर घूमने लगा माता पिता और प्यारी बहन का चेहरा। उसके मन में बेइज्जती के भय ने जन्म ले लिया था, आँखों से आंसुओं की बारिश हो रही थी।
    और ह्दय पटल पर एक ही प्रश्न - आखिर क्या कसूर था मेरा??

    जारी है.............

    ©krishn_ratii (रोली मिश्रा)
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    कसूरवार(लघु कथा)

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    (रोली मिश्रा)
    ©krishn_ratii