• rahulrsjain 24w

    "Please"

    मुद्दतों बाद , तेरा जिक्र
    जुबां पे आया हैं
    बिछड़ा हुआ परिंदा
    फिर जमीं पे लौट आया हैं
    शिरकत थी जिसकी आसियां बनाने की
    वो आसियानों में रहने का
    दर्द सीख आया हैं

    पुरी जिद उसकी थी ,
    थोड़े ख्यालात मेरे थें
    पुरा आँसमा उसका था
    बस कुछ परिंदे मेरे थें
    मौत इक मर्तबा , सीने मे दफन हैं
    दुआओ में जिक्र होने के बाद
    खामोश हो चुके पल मेरे थे
    उसकें लियें , बनके रह गया सवाल
    दुनिया के सामनें ,
    उसकी खामोशी में छिपें
    सारें जवाब मेरें थें

    ©rahulrsjain