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    कुछ देर

    कुछ देर और रुक जाओ,
    अंजानो की इस भीड़ में कभी तो टकरा जाओ।

    जूठ को सच और सच को हकीकत बना जाओ,
    इस दिल में दफन यादों का एक दिया जला जाओ।

    बेरंग सी इस जिंदगी में थोड़े रंग भर जाओ,
    दिल से ना सही तो आंखों से गुफ्तगु कर जाओ।

    ज़िंदगी इतनी हसीं तो नहीं,
    पर उस छोटी सी जिंदगी हमे कहीं हँसना सिखा जाओ।

    जा ही रहे हो तो दिल की कुछ बात तो करते जाओ,
    पर ये दिल तो यही कहता है कि कुछ देर और रुक जाओ।।


    ©the_grey_notes | सौरभ गौतम