• shayarnaqqash 15w

    फूल अब खिलते हैं शज़र देखकर
    नज़ारे बदल जाते हैं नज़र देखकर

    छोटी-छोटी आँखों में ख़्वाब बड़े ले
    लोग इधर आ जाते हैं शहर देखकर

    उसके लौटने का हमें इतना यकीं था
    उम्र बसर हो गयी रहगुज़र देखकर

    सारी रात, रात ही से की गुफ़्तगू मैंने
    वो भी सोने चली गयी सेहर देखकर

    सारे शहर की मेहमांनवाज़ी कर सुकूं
    उलटे पांव लौटता है मेरा घर देखकर

    तुम्हें जन्नत क्यूँ नसीब होगी 'नक़्क़ाश'
    आँखें मूँद लेते मस्ज़िद-मंदर देखकर