• akshay15019 23w

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    रचना- कप्तान सौरभ कालिया

    रिश्तो की डोर
    बड़े लाडो से पाला
    माँ ने गोदी में संभाला
    और अनवरत उसका बढ़ना
    और अपने भविष्य के सपनो को गढ़ना

    फिर उस दीपक ने उजाला किया
    और अपना सपना पूरा किया
    देश की बागडोर, या शांति की डोर

    कारगिल के ककसार इलाके की गस्त
    दुश्मनो के इरादों को कर रही थी पस्त
    कई गतिविधियों का होना
    और सीमा पर हलचल होना
    सीमा पर उपकरणों का आधान
    भारतीय सेना का मुख्य व्यवधान

    सीमा से जवानो को बंदी बनाना
    और अपने देश में ले जाना
    एक दिन रेडियो सकारदू की आवाज
    कब्जे में है पाकिस्तान में जाबांज

    मानवीय उत्पीड़न का चरम पर होना
    और अनेको कुकृत्यों का होना
    कभी सिगरेट से हाथ जलाये
    कभी कानो पर गर्म रोड लगाये
    कभी हड्डियों को तोडा
    दांतो को भी तोडा
    जीभ को काटा जिससे न बोले
    और उत्पीड़न की बात को न खोले
    आँखों को निकाला
    और गर्म चीज से उनको दबाया
    इतनी जिल्लत सही
    फिर भी राज की बात नहीं कही

    अपने बेटे की वीरता को बाप ने देखा
    और आज भी लड़ रहा है
    कभी फौजी हुक्मरानो से
    कभी आजादी के परवानो से
    कभी देश से कभी विदेश से

    सबने उनकी बात सुनी
    और कर्क के लिए जाल की बिसात बुनी
    पतंगे का प्यार आग
    आग में देश के लिए राष्ट्रभक्ति का राग
    ये तो ऐसे दीवाने
    देश रक्षा के परवाने।।

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    रचना- कप्तान सौरभ कालिया
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    © अक्षय चम्पावत