• shreekant_gupta 22w

    कुन्ती ( 3 )

    # Hindiwriters

    दुर्गन्ध के चलते कुन्ती के मन में आया कि बच्चों को डांटकर यहां से भगा दूं । मगर उसने मन में आए घृणा के भाव को
    तत्काल बाहर निकल दिया । सोचा , बच्चों को तो मैंने ही बुलाया है । कुछ बातें कर ही लूं ।
    " आओ ,...... तुम सब क्या खेल रहे थे । " कुन्ती ने पुचकारते हुए पूछा ।
    " हम तो मोती के साथ गोटी - गोटी खेल रहे थे ।" आठ
    साल की नीलू ने मोती की तरफ इशारा किया और मुट्ठी खोलकर गोटी भी दिखाया । उसके हाथ में ईंट के छोटे-छोटे टुकड़े थे ।
    " मैं तुम लोगों के लिए बिस्कुट लायी हूं । खाओगे बिस्कुट ।"
    " हम खायेंगे बिस्कुट , हम खायेंगे बिस्कुट । " तीनों बच्चें खुशी से चिल्ला पड़े । चार साल का चुन्नु तो दोनों हाथों को उपर कर जमीन पर खुशी से उछलने लगा ।
    " तुम सब अच्छी तरह हाथ मुंह धोकर आ जाओ ।तब तक बिस्कुट निकालती हूं । "
    बच्चें शीघ्र ही हाथ मुंह धोकर आ गये । बिन बुलाए उनके जीवन में बहार जो आ गई थी !
    बच्चें खुब आनंद लेकर बिस्कुट खाये और खेलने चले गए ।
    बच्चें सभ्य बने , ससुराल में कुन्ती का यह प्रथम प्रयास था । अगले दिन से बच्चें छोटी माई से पुनः बिस्कुट
    पाकर खुश थे । वे छोटी माई की बातों का अनुसरण करने लगे । बच्चों में धीरे-धीरे परिवर्तन होते देख घर के सभी सदस्य आनंदित थे ।
    इस प्रकार घर में कुन्ती का मान सम्मान बढ़ने लगा ।
    परिवार की गाड़ी इसी प्रकार बढ़ती जा रही थी ।
    एक दिन परिवार के सभी सदस्य घर में मोजूद
    थे । कुन्ती ने सभी के समक्ष एक प्रस्ताव रखते हुए कहा_
    " मैं घर के तीनों बच्चों को पढ़ाना चाहती हूं । आप सब
    अपनी सहमति दें । "
    ( जारी .............)
    ©shreekant_gupta