• lakshmipati_ravishekh 16w

    Scholar

    नहि कागद नहि लेखनी, नहि अक्षर है सोय
    बाांचहि पुस्तक छोरिके, पंडित कहिय सोय।
    बिना कागज,कलम या अक्षर ज्ञान के पुस्तक छोड़कर जो संत आत्म-चिंतन और मनन करता है उसे हीं पंडित कहना उचित है।

    Nahi kagad nahi lekhni , nih akshar hai soye
    Banchahi pustak chhorieke , pandit kahiye soye .

    Neither paper nor pen , nor do the letters mean a thing.
    One who speaks without using books , know him to be a scholar.

    © Kabiradas