• suruchisharma 15w

    खामोश होकर तेरी आखों से बात कर लेती हूँ
    कशिश वो प्यार की भी आखों में ढूंढ लेती हूँ
    लफ्जो को ना जाने तुम कब आकार दोगे
    इसलिए खुद को खुद ही समझा लेती हूँ
    ©suruchisharma