• ganeshdhami 22w

    जिक्र तेरा..

    एक दिन जरूर,पूरी दुनियां जानेगी यह इश्क़ मोह्हबत,प्यार,कितना है तुमसे,उश दिन सब पढ़ेंगे, सुनेंगे,और हर जज़्बात अल्फ़ाज़ तुम भी पढ़ना वो दौर शायद 30 का हो या 40 का पर उश उम्र मे भी एक एहसास तुमको जरूर होगा।
    किताब ,कलम अब हर उश चीज मे तुम्हारा जिक्र होगा।
    अधूरी मोह्हबत,अधूरी बातों का।
    बस तुमसे नहीं ,पूरी दुनियां से होगा।
    अब बिखर चुका हूँ तो जरा तड़पने दो...जरा एक बार मर कर फिर जी जाने दो।
    तुम्हारी ख़ुशियों की दुवाएँ करूँगा।उश अँधेरी रात मे भी।जब चाँद की रौशनी ग़ुम होगो,तुम कभी अकेली जो होगी तोह मैं आऊंगा लौट कर,बन कर हवा, वो बारिश,और वो एहसास...जो तुम्हे छु कर गुजर जायेगा।तुम देख नहीं पाओगी,पर नज़रो के सामने ही रहूँगा..बस मुस्कुराना की तुम यह सब चाहती थी,तुम्हारी खुशियों के लिए हज़ार गम कम है।पर कुर्बान है यह जिस्म जान और रूह सिर्फ तेरे लिए।
    खुश रेहना,आबाद रेहना,...जिंदगी को जीना...
    और मुझे याद रखना....
    ©ganeshdhami