• kavish_kumar 1w

    HIMANSHU_&_KAVISH

    वो परेशान है यह सोचकर...
    क्यूँ ये दुनिया परेशान कम है...
    सोच दूसरी की परेशानी पर ज्यादा है सही कहा 'हिम-अंश'....
    सब जुदा जुदा है दुनिया में अब इंसान कम है..
    यूँ तो अरबो में है होने को तो...
    पर सच है, उनमें इंसान कम है...
    जो बना है सब विध्वंस पर है..
    इंसान की बिरादरी का निर्माण कम है..
    जुगलबंदी चलानी पड़ेगी आप ही से ही..
    आसपास में जाने पहचाने मकान कम है..
    वो तो हम है जो सुन लेते है आपस की बात...
    वरना आजकल बातो को सुनने वाले कान कम है..
    आजकल करनी कम कथनी ज्यादा हो गई..
    इसलिए कुछ को तो आराम है बाकी सब आंखें नम है..
    आँखो से अश्क देख भीतर से आवाज आई...
    घबरा मत यार तेरे कलेजे में बहुत दम है..
    मुंतजिर बनकर कब तक बैठे रहे...
    आज हरपल बोलने वाला सच में गुमसुम है..
    एक हकीकत को मान ले तू...
    ऐ दिल ,तुझमे दिमाग कम है ..
    आजकल दिमाग वैसे ही खराब है...
    अब वो हंसी खुशी का दिल में राग कम है...