• yogeshkaushik_ 6w

    पानी

    जब खत्म हो जाएगा पानी
    किसी बिछड़े आशिक की
    आंखों का नही,
    बल्कि धरती की काया का पानी
    जो इंसान चूस रहा है,
    जैसे मच्छर चूसता है
    खून इंसान का।
    शायद,
    और सोचता होगा
    कि इंसान के पास तो भंडार है जैसे खून का
    उसे नही पड़ेगा कोई फर्क।
    और सोचता है इंसान भी
    शायद ऐसा ही,
    मगर होते हैं कुछ मच्छर
    भयानक बीमार कर देने वाले भी।
    मछरों की तरह ही तो है आदमी
    धरती से करें अगर तुलना तो।
    और है व्यवहार भी वैसा ही,
    जो कर रहा है बीमार,
    बहुत बीमार
    धरती को जैसे
    कोई भयानक मच्छर खून चूस कर करता है
    इंसान को।
    फिर इंसान खोजता है तरीके
    मच्छरों को मिटाने के,
    जो होते हैं सफल भी।
    क्या धरती खोजेगी नही तरीके वैसे ही?
    कोई जैसा बोता है
    क्या वैसा काटता नही?
    ©yogeshkaushik_