• malisha 6w

    निःशब्द

    निःशब्द हूँ मैं आज ...पुरानी याद ताजा हो गयी ....सोचा क्या केहर सी होगी वो पल जिसमे एक कच्चे से धागे को खींच के उसको यु तोड़ा...की एक मजबूत धागा .....बन ना सके फिर कभी ....गिरफ्त में क्यों हो रहे है लोग ....भूखे हवस के शिकारी बन क्यों रहे लोग......
    लोग डरते थे खूंखार जानवर से ....लेकिन....इंसान से लोग कैसे अपनी कच्ची डोर को बचा पाये ....हैरान और परेशांन हूँ ...इंसान को इंसान से कैसे बचाया जाए ....????