• medicosasmitawrites_ 33w

    वो हमारी पहली म़ुलाकात थी;
    जब हमारी नज़रें तुम्हारी नज़रों से
    टकराई थीं;
    तुम्हारे मुस्कान में जाने क्या जादू था;
    कि हम अपना ग़ुरूर भूल गए।
    तुम्हारी कश़िश का ऐसा हुआ असर;
    कि हम ख़ुद से हो गए बेख़बर;
    उस दिन हम बारिश में ऐसे भीगे;
    जैसे वो बूँदें भी प़ैगाम हों तुम्हारे इश़्क का।
    ©medicosasmitawrites_
    दिन शायद रोज़ाना की तरह होता;
    वो हसीन चेहरा गर उस दिन दिखा न होता;
    जैसे बेजान दिल को धड़कन-सी मिल गई हो;
    जैसे बंजर ज़मीन पर बारिश गिर गई हो;
    जैसे पतझड़ में कुछ गुल खिल उठे हों;
    जैसे प्यासे को कोई नदी मिल गई हो।
    वो बारिश और उसकी बूँदें और उसका ख़ूमार
    इस एहसास का इल्म न होता गर वो दिन न होता।
    बारिश जिसमें तुम भीगे, बारिश जिसने मुझे भीगो दिया;
    दो दिलों की धड़कन को मौसम ने;
    जब एक धागे में पिरो दिया।
    _by dhawankush
    वो पहली म़ुलाकात में नज़रों का चुराना;
    चुपके से मेरा मुस्कुराना;तुम्हारा यूँ निहारना;
    तुम्हारे ग़ुरूर का छूमंतर हो जाना;
    ये क्या मुश्किल है अब समझ पाना;
    जब तुम बरसात में भीगे थे;
    मेरे तन-मन भी एहसासों से गीले थे;
    ता-उम्र याद करोगे, ये बेरूखी नज़रें तलाशोगे;
    फ़िर आओगे हमारी कब्र पर;
    दो -बूँदों से हमको सींचोगे।
    -By baanee