• aazad_parinda 24w

    नोट-सुरुवात की कहानी �������� पहले पढ लें।

    तुम्हे याद है 9th क्लास के भूपेश को किसी ने पत्थर से मार दिया था वह मैं था। हाफटाइम का वक़्त था। हम लोग खेल रहेथे और उसने कहा की तुम..........हो। मुझे बहुत गुस्सा आया। मन तो कर रहा था की उसको इतना पीटूं की फ़िर कभी किसी के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने पहले हजार बार सोचे पर मैं छोटा था कैसे करता यह सब पर घर वापसी के वक़्त मौका मिल गया और झाड़ी में छुपकर बैठा था मैं। जानता हूँ ऐसा नही कहना चाहिये था पर बचपन, बचपन होता है और बचपन का प्यार मासूम।


    इतने सालों बाद आज क्योँ यह सब बता रहा हूँ मैं यही ना। यह सिडनी शहर है बहुत बड़ा पर यहा किसी के पास दो घड़ी साँस लेने की फुर्सत नहीँ है। सालों पहले जब मैं आया था तब भी ऐसा था आज भी वैसा ही है। लोग यहाँ बड़ी महत्वाकांक्षाओं के साथ आते और उन महत्वाकांक्षाओं को पूरा करते-करते कब बाल सफ़ेद हो जाते हैं पता ही नहीं चलता।

    दो बच्चे हैं मेरे इशा और मनन। इशा इसलिए कि वह तुम्हारी तरह है, रूप से नहीँ गुणों से। प्रेम बहुत है मुझसे पर वे अब एक वक़्त का "मैं" बन चूके हैं। इसलिए हम सभी बूढ़े सप्ताह में दो बार सोसाइटी के क्लब में मिलते हैं। आज पता नहीँ कैसे किशोर ने सभी से कहा की आज सब पहले प्यार की कहानी बताएँ तो मैने भी बता दिया। फ़िर ख़्याल आया उन्हे बता दिया तो तुम्हे क्योँ नहीँ।


    नैना....आयी थी आज। कह रही थी तुम्हे उसकी फ़िक्र रहती है। उसे जल्दी ही काम मिल जाएगा। यहाँ काम मिलने में थोड़ा वक़्त लगता है। मैं यहाँ हूँ उसकी फ़िक्र करने के लिए। वह मेरी अपनी पोती ना सही पर पोती जैसी तो है। अपना ख़्याल रखना।


    तुम्हारा जूनियर

    -सुदीप
    सिडनी, आॅस्ट्रेलिया

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    Confession Of First Love

    सम्बोधन मे क्या लिखूं यह समझ नही आ रहा। आदरणीय कहूँ तो तुम मुझसे सिर्फ़ एक क्लास बढ़ी हो और प्रिय और प्रेयसी शब्दों का इस्तेमाल करना शायद ठीक ना लगे तुम्हे तो मैंने सम्बोधन का स्थान खाली रख छोड़ा है तुम्हे जो सही लगे वह तुम समझ लेना।

    भले दिमाग यह बूढ़ा हो गया हो पर तुम्हारी वह तस्वीर इस में ऐसे बैठ गयी है की मानो इसने ठान लिया हो अब यह मेरे साथ ही उपर जायेगी। याद है तुम्हे हमारी पहली मुलाकात जब तुमने मुझे पिटने से बचा लिया था। और दूसरी मुलाक़ात कैसे भूल सकता हूँ मैं, वह सबसे अच्छी यादोँ में से एक है। उस दिन मैं टिफ़िन नही ला पाया था पर तुम ने अपना टिफ़िन शेयर किया। सच कहूं तो वह खाना इतना अच्छा नही था पर तुम्हारा साथ बहुत अच्छा लगा था।


    अच्छा हाँ एक और बात। वह जो तुम्हारी बेन्च पर इशा+दीप लिखा था वह मैने लिखा था पर तुम ने खामखाह मन्दीप को पिटवा दिया। बेचारे को सर ने सारे क्लास के सामने मुर्गा बनाया, तीन दिन उनकी क्लास में। बहुत अफ़सोस हुआ मुझे इसलिए नहीँ की मन्दीप पिट गया बल्कि इसलिए की शायद मैं तुम्हे नहीँ पा सकूँ। मैं बहुत डर गया था।