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    ��तुम्हारी परछाई हूँ मैं ��

    हाँ तुम्हारी परछाई हूँ मैं।
    तुमसी हूँ, तुम में शामिल हूँ मै।
    तुम आगे चलते हो।
    तुम्हारे पीछे चलती हूँ मैं।
    हाँ तुम्हारी परछाई हूँ मैं।
    तपती धूप में रहती हूँ साथ तुम्हारे।
    अंधियारे में तुम में ही बस जाती हूँ मैं।
    तुम चहकते हो मैं भी चहकती हूँ।
    तुम बहकते हो मैं भी बहकती हूँ।
    तुम मुझसे मैं तुमसे जुदा नहीं।
    एक है हम तुम वजूद हो मेरा।
    तुम बिन मेरी कोई हस्ती नहीं।
    लेकिन हमारा मिलना संभव नहीं।
    फिर भी करती हूँ एक वादा तुमसे।
    पाओगे मुझे खुद से अलग नहीं।
    क्योंकि मैं परछाई हूँ तुम्हारी
    किसी आईने का टुकड़ा नहीं।
    हरे कृष्णा ��
    ©rolipoetry

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    ��हरे कृष्णा ��
    ©rolipoetry