• ravinab 12w

    हम बहोत से र्निणय लेते है क्योंकि हम अपने भविष्य को बेहतर ,सरल ओर सुखमय बनाना चाहते है पर भविष्य तो कोइ नहीं जान सकता केवल कल्पना ही कर सकते हैं हम निर्णय भी भविष्य को ध्यान मे रख के ही करते हैं
    सारे सुखों का आघार धर्म है जो मनुष्य के हृदय मे है तो कुछ भी निर्णय लेने से पहेले अपने हृदय से पुछे की जो निर्णय आप लेना चाहते हैं वो स्वार्थ से जनमा है या धर्म से...!