• reechukumari 6w

    शायद

    एक समय आएगा ज़िन्दगी में,
    जब आँखें बन्द करने का वक़्त आएगा,
    सब कुछ पीछे छूटता जाएगा,
    बहुत कोशिशों के बाद भी हम कुछ थाम नहीं पाएंगे,
    हर वक़्त, हर पल को रोकने की कोशिश,
    जैसे आखिरी पलों को जी लें,
    जैसे रोक दें सब,
    वो वक़्त आएगा, जब पुरा सफ़र ज़ेहन में दोहराएगा,
    पर हमें रुकना नहीं है,
    अब हमें जाना है, उस पार
    एक नया सफ़र, एक नयी राह, नये लोग, नये रिश्ते,
    एक नया जीवन, जहा फिर कोशिश करनी है
    की सब समेट ले, सब संभाल ले,
    शायद तब अंत अलग हो,
    शायद तब ये सफ़र साकार हो जाएं,
    शायद तब जीने की तलब फिरसे जागे,
    शायद तब सब साथ हों,
    शायद तब कोई शायद ना हों,
    शायद ! शायद ! शायद !
    ©reechukumari