• mrkkbadboy 7w

    एक गज़ल....

    याद जब मौत की गहराइयों में ठहरने लगे
    कोई मंजर किस डगर को जब ठहरने लगे

    ख्वाब कशमकश तनहाइयों में उतरने लगे
    महबूब खुदा बनकर दिल में ठहरने लगे

    ना किसी की ये खता है ना कहीं दिल लगे
    खामोशियां अंधेरे से उतर के रूह में ठहरने लगे

    कदम आंसुओं के समुंदर पर चलने लगे
    याद जब मौत की गहराइयों में ठहरने लगे

    प्यास पानी के बिना अधूरी-सी लगे
    आंखों में प्यार जब रुक-रुक ठहरने लगे

    कयामत की रात जिंदगी जब लगने लगे
    याद जब मौत की गहराइयों में ठहरने लगे

    ©Mr.KK bad boy