• kumarashishh 10w

    आँखें खोलो,
    क्यों नज़रें झुकाये बैठी हो,
    मैंने कहा आँखें खोलो,
    क्यों नज़रें झुकाये बैठी हो।

    लगता है राज़ कई हैं
    जिन्हें दिल में दबाये बैठी हो,
    पलकों को खोलो,
    मुंदी आँखों में जो सपने हैं उनसे बोलो-
    "अब समय आ चूका है साकार होने का।"

    चार लोगों से अब मत डरो,
    अब वक़्त है चलो आगे बढ़ो,
    मुसीबत से भिड़ो,
    मजबूत बनो।

    उड़ने की तैयारी करो,
    बस अब पीछे मत मुड़ो,
    खुद पे भरोसा रखो,
    और जिन्हें तुमसे उम्मीद नहीं है
    चलो उन्हें अब चकित करो,
    खुद के लिए जीयो
    और खुद को खुद से सम्मानित करो।

    ©kumarashishh