• randhir_ab7 5w

    कुछ ख़्वाबों के परिंदे ले कर चल रहा हूँ मैं,
    अपने अंदर, एक समंदर ले कर चल रहा हूँ मैं।
    महफ़िलो की अमानत ले कर चल रहा हूँ मैं,
    अपने रूह से अब ज़मानत ले कर चल रहा हूँ मैं।
    मनका-ओ-आयतें से खुदा की कर ली बंदगी,
    कुछ धड़कनों में एक ज़िन्दगी ले कर चल रहा हूँ मैं।
    रास्ता ज़रा कठिन है और लोग कुछ ख़फ़ा,
    मगर ख़ामोशियों का एक मंज़र ले कर चल रहा हूँ मै।
    किसी की दुआ, किसी का आशीर्वाद ले कर चल रहा हूँ मैं,
    कुछ कर गुज़रने का ख़ाब ले कर चल रहा हूँ मैं।
    उल्फत का मज़ाल ले कर चल रहा हूँ मैं,
    खुद में एक मिसाल बन के चल रहा हूँ मैं।
    कई अनकही रूदाद हूँ अपने दिल मे छुपाये,
    अपने आप में एक इतिहास बन के चल रहा हूँ मैं।
    तुझे भी "आफ़ताब" मुक्कमल होगी रुतबा-ऐ-सिकंदर,
    क्योंकि हसरतों का एक सैलाब ले कर चल रहा हूँ मैं।
    ©randhir_ab7