• arun_kumar_keshari 23w

    बलात्कार /समाधान
    *************समीक्षाधीन

    बलात्कार को शब्दा-अनुकुल देखे तो बल के बल पर भय द्वारा किया गया कृत ही है इसमें सहमति की कोई गुंजाइश ही शेष नही रह जाता अतः बलात्कार अपराध की श्रेणी में आता है ।
    इस पर अंकुल के लिए सज़ा का लचीला न होना, जल्दी न्याय मिलना और सभ्य समाज में इसके लिए कड़े कानून का होना निहायत जरूरी है।
    जिसके अंतर्गत- " लिंग विच्छेदन के साथ ही दोनों आंखों की ज्योति छिन लेना (अवैश्कों वअबोधों )के मामले में जरूरी है" तभी इस समस्या का सही सामाजिक समाधान निकल सकता है ।
    इस अपराध के लिए अपराधी को जेल में रखना सबसे बड़ी मूर्खता है ।

    @अरूण कुमार केशरी
    ©arun_kumar_keshari