• yogeshkaushik_ 6w

    मैं कहाँ रह पाता

    एक शहर ऐसा है जिसमें दुकान बिकती हैं
    एक दुकान ऐसी है जिसमें शहर बिकतें हैं
    मैं एक ऐसे ही शहर से गुजरा हूँ
    मैंने कई शहर खरीदे हैं।

    कई लोग देखते हुए गुज़रते हैं
    कई लोग गुज़रते हुए देखते जाते हैं
    मैंने दोनों ही काम किए हैं
    बाद वाला पहले और पहले वाला बाद में।

    मैंने कभी रेगिस्तान नही देखा था
    मैंने कभी समुद्र नही देखा था
    न कभी कोई पठार देखा था
    न ही गहरी भूमि कोई ...
    बस समतल मैदान देखा था
    तुझसे मिलने के बाद इनसे परिचित हुआ।

    तुझे श्रृंगार पसन्द था
    मुझे सादगी पसन्द है।
    मेरे यहाँ गेंदे के फूल होते हैं
    गेंदे के फूल बालों में नही लगते।

    मैं एक ऐसा कवि हूँ
    जो छिपकर कविताएँ लिखता है
    मैं भला कहाँ तेरी आँखों में रह पाता।
    ©yogeshkaushik_