• mrigtrishna 3w

    मैंने देखा है सूरतें बदलते हुए,इंसा को कई रूप में ढलते हुए,वज्र सीना छलनी सा नज़र आता है,शोख़ हुस्न यहाँ मातृत्व में दब जाता है,मैंने देखा है वक़्त ए करवटें बदलते हुए,इंसा को कई रूप में ढलते हुए,एहसासों का यहां क़त्ल किया जाता है,दिलो के खून से जिगर को सिया जाता है,मैंने देखा है अपनों को चालें चलते हुए,खुद को ही अपने से जलते हुए,हर कोई यहाँ नक़ाब ओढ मिलने आता है,दिल मिले न मिले गले से लग जाता है, कभी कहा कभी सहा भी न जाता है,इंसा इतना नंगा सा नज़र आता है,मैंने देखा है साँपो को पलते हुए,गिरगिटों को रंग बदलते हुए....शायरों को राजनीति करते हुए
    ©mrigtrishna