• ak__07 6w

    माँ तुम्हारे बारे में क्या ही लिखूं मैं...
    लिखना तुमसे सिखा...सीखा तुमसे पढ़ना मैं...
    साल का एक दिन कैसे करूं नाम तुम्हारे....
    जब याद करता हर पल हर घड़ी तुमको मैं....

    माँ तुम्हारे बारे में क्या ही बताऊं इस जग को मैं...
    हर डर से नाम तुम्हारा लेके लड़ता मैं...
    साए में तुम्हारे ही बस महफूज़ हूं मैं...
    कैसे दिखाऊं इस जग को मैं..माँ को अपनी धड़कन में लेके चलता मैं....

    दूर मीलों घर से इस भीड़ में एक मंजिल ढूंढ रहा हूं मैं....
    याद हर दिन करता ....माँ को ही अपना घर कहता हूं मैं...
    बचपन मेरा तुम....अपनी माँ की ज़िन्दगी की निशानी मैं...
    ख़ुद को भूल मुझको देखा...माँ के बलिदानों की कहानी मैं...

    कैसे बयां करूं पूरी कहानी..अपनी माँ का पूरा एक अंश हूं मैं..
    माँ मेरी सबसे भोली..उसकी नज़रों में बस एक सुपरहीरो मैं..
    ना मंदिर जाता...ना कोई सजदा करता हूं मैं...
    माँ में तीर्थ पाता...माँ के आगे ही झुकता हूं मैं...
    ©ak__07