• _varshney_ji 22w

    वो कितनी अनोखी शाम थी
    वो मेरे साथ थी
    कभी वो हँसती, कभी शरमाती
    कभी चुपके से नजरें चुराती
    साथ उसके , सब भूल चुका था मैं
    क्योंकि जिन्दगी के हसीन लम्हों को जी रहा था मैं
    उसका मेरे साथ होना एक खूबसूरत एहसास था
    पर किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था
    हुई आहट , और पता चला मुझे
    हकीकत से कोसों दूर, एक ख्बाब को जी रहा था मैं............


    ©_varshney_ji