• shivam_raturi 14w

    कुछ कहते हैं, कि सरकारी नौकरी मिलना इतना कठिन है कि, इसे मिलने के बाद नौकरी का भरपूर आनंद लेना हमारा अधिकार है। कुछ कहते हैं कि जब हमारे विभाग में सब ऐसा ही करते हैं, तो हमें भी अब ऐसी ही आदत लग गयी। अब यह तर्क हैं या कुतर्क, यह मैं इस लेख के पाठकों पर छोड़ता हूँ।
    अगर आप प्रदत्त वेतन के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं, या अपने पद की गरिमा के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं, तो इसका सीधा असर आपके बच्चों पर पड़ता है। यह एक ऐसा प्रत्यक्ष कुछ वर्षों से मैं नोट कर रहा हूँ, जिसे शायद प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।
    सारे कार्मिक ऐसे होते हैं, यह मेरा कहना कतई नहीं है। कई लोग काफी ईमानदारी से भी काम कर रहे हैं। उनकी स्तिथि गेहूं में घुन के पिसने जैसी है। उदाहरण के तौर पे मेरे प्रशिक्षण कार्यालय में 7 अभियंता हैं। 10 बजे के कार्यालय समय पे 7 में से मात्र 2 ही 10:15 तक कार्यालय पहुचते हैं। अनुपात कितना कम है, यह साफ विदित है (मात्र 28.57%)। यानी यह शिष्ट-जन नैतिक