• 10ishka 14w

    वो बर्फ सा पिघल गया
    जो नीर सा उबल गया
    समय सा बदल गया
    वो रीत सा जो ढल गया
    उसका इंतज़ार मै क्यूँ करू ?

    सूर्य सा जो ढल गया
    उजाले को निगल गया
    काली स्याह रात में
    मुँह छुपा निकल गया
    सुबह तक
    उसका इंतज़ार में क्यूँ करू ?

    अकेली कहाँ
    जो हवा मेरे संग है
    याद कुछ प्रसंग है
    यार मेरा जोश है
    अपना मुझे होश है
    मुझे नहीं कोई हया
    तो वो, जो साथ छोड़ गया
    मनमस्त राहो पर
    उसका इंतज़ार में क्यूँ करू?
    ©10ishka