• nittuu 15w

    फ़साने

    बहुत कड़वाहट थी उसके प्यार में
    मेरी मिठास काम नही आई
    इतना सच्चा था मेरा प्यार
    उसके जुर्म भी किताब में फूलों से लगे
    जमाना तो झुक ही रहा ह मेरी पलकों के नीचे
    मुझे आज भी उसका नाम
    मुझे याद करने के बहाने से लगे
    आज उसकी जरूरत ही नही पड़ती
    उसकी यादों से मोहोब्बत करने लगे
    जमाना लाख ठोकर पर भी
    नही तोड़ पाया मुझे
    मेरे प्यारे पल ही बस जीने के
    बहाने से लगे
    भरी महफ़िल में भी
    बेगाने से लगे
    फ़र्क़ नही पड़ा उसके न होने का
    उनका न होना ही उन्हें याद करने के बहाने से लगे
    कोई बड़ी नही है मेरी हस्ती
    ज्यादा दूर नही हे उनकी बस्ती
    वापस आना उनके पास आने के बहाने से लगे
    वो रोया नही कभी
    मैं सोया नही कभी
    यही सब तो मेरेे प्यार के पैमाने से लगे
    करे चाहें ज़ालिम जुल्म जींद पर जितने भी
    जींद तो बस उनकी रिन्द पर से लगे
    रूह से रूह की बातें है
    यही सब मुझे मेरे प्यार के फसाने से लगे
    अब न जाने उन्हे ,अब भुलाने में कितने जमाने लगें
    ©nittuu