• varshukashyap 5w

    उनके गीले खुले बालों की महक
    मेरी रूह में उतर जाती है
    जब वो खिड़की खोल मेरे कमरे में
    रोशनी जगाती हैं
    उनकी खिलती मुस्कुराहट
    मेरे माथे की शिकन को सहला कर जाती है
    छम-छम करती जब वो
    पूजा की लौ घर आँगन में घुमाती है
    मीठा-मीठा सा गीत
    मन ही मन बुदबुदाती हैं
    मेरी अँधेरी सुबह को जैसे
    उजालो से भर जाती है
    चूड़ियों से भरी नाजुक कलाइयांँ
    मेरे लिए जब भी दुआ में उठते हैं
    उस पल मेरी नज़र में वो
    माँ से फ़रिश्ता हो जाती है
    जिससे मेरी हिफाज़त में खुदा ने भेजा है।

    माँ पर और क्या लिखूं ?
    माँ ने तो खुद मुझे लिखा है।

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    माँ

    ©varshukashyap