• manisha26 35w

    संभव
    संभव था कि मैं भी चली जाती,छोड़ कर यह घर।
    जैसे तुम गए इस दुनिया से मुझे अकेला छोड़ कर।।
    पर मैं भाग ना सकी तुम्हारी छोड़ी हुई जिम्मेदारियों से।तुम्हारे माँ-बाप की देखभाल और अपनी बेटी के सपनों को उड़ान देनी थी मुझे।।
    क्या यह संभव नहीं कि तुम लौट आओ थक गई हूं मैं अब, दे दो मुझे अपने कंधों का सहारा।
    @hindikavyasangam#hks

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    ©manisha26