• kishore_nagpal 13w

    अंग संग गुरुदेव

    जी,
    विश्वास रखना पडेगा कि महाराज श्री जी कही भी नही गये.है, बल्कि अब सूक्ष्म रुप मे पहले से भी ज्यादा हमारे पास
    हर पल, हर क्षण
    हमारी स्वाँसो से भी ज्यादा नजदीक हमारे...

    जब जब हम जीवन मे महाराज श्री के दिखाये पथ पर चलने का.प्रयास करते है, वे आभास रुप मे अवश्य प्रकट होते.है।
    जब जब हम उनके दिखाये अनुसार जीवन जीने का प्रयास करते है,
    वे अवश्य हमारे साथ रहते है ।
    जब जब हम गहन ध्यान मे बैठकर उनसे बात करते है
    (बिल्कुल उसी तरह से जैसे एक छोटा सा बच्चा अपनी माँ से बात करता है), तब महाराज श्री अवश्य अपनी उपस्थती के हस्ताक्षर देते है।
    जब जब हम दूसरो के लिये पूरे निस्वार्थ भाव से, निष्काम भाव से प्रार्थना करते है, तब महाराज श्री अवश्य अपने होने का अहसास कराते.है।

    रोम रोम मे, कतरे कतरे मे बसे हुये है, वे तो
    उन्हे तो अपने से अलग कर पाना ही संभव नही।
    ©kishore_nagpal