• ashwani 7w

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    ये पोस्ट मैं उनके बेटों के दिल की बात सुनाने के लिए लिख रहा हूँ, जो अपनी घरेलू समस्याओं को सुलझा नहीं पाते और अपनी माँ को वृद्धाश्रम की कठोर पीड़ा दे देते हैं। ऐसे बेटों के मन में कभी तो ये विचार आया होगा, अगर आया हो तो अपनी माँ को वापस बुला लें, माँ के बिना घर मकान होता है। माँ हो तो झोपड़ी भी मंदिर है

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    माँ

    एक खलिश सी है हवाओं में
    कुछ कमी सी है दुआओं में
    तेरे हाथ को जब से छिटका है माँ
    खुद की इज्जत घटी सी है निगाहों में

    ©अश्वनी राणा