• moni_sharma 23w

    मासूमियत ख़त्म

    >>रिश्ते ख़त्म ,शराफ़त भी ख़त्म ,
    ..... उसने मेरी मासुमियत का फायदा उठाया .....
    आज दुनिया से मासुमियत भी खत्म ।

    ◆>>अपना समझ कर मैंने जिसपे विश्वास करा,
    और उसने भी मुझे बहुत दुलार करा ,
    बचपन से जिसे पिता सामान समझा मैंने....
    उसी चाचा ने मेरे साथ गलत व्यव्हार करा ।
    ◆>>उसकी शैतानी नज़रों को पहचान नहीं पायी मैं ,
    मासूम थी, उसके इरादे भांप नहीं पायी मैं,
    उसने इस कदर जकड़ा मुझे .................
    माँ को आवाज़ तक ना लगा पायी मैं ।
    ◆>>मेरी उमर अभी खेलने की थी ,
    माँ के साथ छोटे-छोटे हाथों से रोटियां बेलने की थी ,
    सपने मेरे मिट्टी में मेल गया वो,
    इतनी कितनी भूख थी उसे ,जो-
    मेरे जिस्म को मॉस का टुकड़ा समज कर खेल गया वो ।

    ©moni_sharma