• kanha007 22w

    जन्नत-ए-जहान में..

    जन्नत-ए-जहान में..
    आज भी तेरी चाह में..
    रोता हूं अक्सर मैं..
    याद फिर्से आ जाती हैं..
    आंखें नम और..
    चेहरे पे हल्की सी एक मुस्कान झोर जाती हैं..
    जन्नत-ए-जहान में..
    तेरी पूरी सी अधूरी चाह में..
    आज भी रोता हूं मैं..
    ©kanha007