• writer_shweta_sinha 6w

    Haan...wo fr mila mujhe !!

    हाँ.....
    वो फिर मिला मुझे,,
    जैसे बहुत खुश है वो ।।
    जब टटोलने लगी मैं उसका दिल,,
    तो जैसे आज भी कह रहा हो जैसे,
    तुम बिन बहुत तन्हा हुं मैं ।।
    न जाने कौन सी जिद है उसे,,
    कि नकाबपोश सा है वो ।।
    मुसकान की चादर ना जाने क्यों ओढता है वो ।।
    खुद को बहुत समझदार समझता है जैसे,,
    पर उसे क्या पता ,बहुत नादान है वो ।।
    बनता यूं है कि जैसे कोई पत्थर है,,
    पर उसको क्या पता, कितना नाजुक है वो ।।
    सोचा मैंने कि,उसके दिल पर हाथ रखूं और बस कह दूं,,
    कि दर्द सिर्फ यहां नहीं है,,
    तेरे दर्द से दर्द मुझे भी है ।।
    ©writer_shweta_sinha