• malisha 6w

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    कुछ रिस्ते मौसम की तरह होते है जो बदलते रहते है। कभी ठंड की ओशो की बूँद .....या कभी बसंत की महक .....या कभी जेठ की गर्मी .....या कभी बारिश की बूंद ......
    रिस्ते भी ओश कि बूँद की तरह बनती है ......बसंत ऋतु की तरह महकती है.....फिर न जाने कब जेठ की गर्मी हो जाती है .....और फिर ना जाने कब टूट के बारिश के बूँद की तरह टुकड़ो मैं बट कर बिखर के गिर जाती है ......