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    बस बहुत हो गया

    बस बहुत हो गया, अब बंद करो दिखावा
    सालों साल हो गए, पूरा ना किया एक भी वादा
    जिन्हें छूट दिया, उन्होंने ही देश को जला डाला
    तब हमारी एक ना सुनी, अब क्यों बना रहे हो बहाना

    अपनी नाकामियों को छुपाते हो
    ध्यान भटकाने को नए मुद्दे बनाते हो
    अपने मंत्रियों पर पैसे लुटाते हो
    दंगे करवाकर निर्दोषों को मौत की नींद सुलाते हो

    माँ बहनें अपमान की घुट पी रहीं हैं
    सर झुकाकर अपना जीवन जी रहीं हैं
    ना अस्पताल का ठिकाना है, ना स्कूल है
    ऊपर से नीचे, सब मनमानी में मशगूल हैं

    किसान कर्ज़ में डूबकर मर रहें हैं
    नेता अय्याशी के पर्वत चढ़ रहें हैं
    भ्रष्ट कानून की धज्जियाँ उड़ा रहें हैं
    पड़ोसी भारत पर आँखें गड़ा रहें हैं

    धर्म के नाम पर इंसानों के साथ-साथ इंसानियत को बाँट रहे हो
    धर्म के वफादारों, धर्म के लिए भगवान को ही काट रहे हो ?
    क्यों तुम शोहरत के मुरीद हो रहे हो
    क्यों शहीदों की शहीदी पर मगर के आँसू रो रहे हो ?

    अगर इसे ‛राजनीति’ कहते हो तो अपराध क्या है
    हमारे सवालों का जवाब क्या है
    हमारे पैसों का हिसाब कहाँ है
    सारे साजिशों का ‛कसाब’ कहाँ है

    तुम्हें मौका दिया, मोहलत भी दी
    विकास करने की हिम्मत भी दी
    अफ़सोस, कि देश के अंदर कुछ नहीं बदला
    अरे गद्दारों, तुमसे तो एक काम नहीं सम्भला

    गरीबों को महंगाई की आग में झोंक रहे हो
    हमें आवाज़ उठाने से रोक रहे हो
    हिंदुस्तान हमारा कबाड़ा हो गया
    तानाशाही तुम्हें गवारा हो गया

    विश्वास करो, हम तुम्हारे विरोधी नहीं
    पर हम धोखे में रहें, ये भी जरूरी नहीं
    सारे पैतरे आज़मा लो, अब कोई फ़र्क नहीं
    क्योंकि हम जनता हैं जनाब, सब समझते हैं, हम मूर्ख नहीं
    ©feel_the_same